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श्री श्याम जी मन्दिर मनौना धाम

श्री श्याम जी मन्दिर मनौना धाम , एक ऐसा धाम जिसने सूक्ष्म समय मे देश दुनिया को अपनी आभा से सुशोभित किया है, कहते हैं कि इस संसार के निर्माण से लेकर वर्तमान समय तक संयोगों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है, जिनका जवाब विज्ञान भी नही ढूंढ पाया है, और ढूंढ भी नही पायेगा, क्योंकि जब सब कुछ परमात्मा की इच्छानुसार होता है तो अतिश्योक्ति और किंतु परंतु का कोई स्थान नही होता है, मनौना धाम के इतिहास में जाने से पहले हम पहले मनौना गांव के इतिहास में जाते हैं, भारत देश ऋषी मुनियों की भूमि है और पुरातन समय मे उनके द्वारा हज़ारों वर्ष की तपस्या से आज का भारत विश्व मे अग्रणी भूमिका का निर्वहन कर रहा है, वर्तमान में बरेली जिला की आंवला तहसील से सिर्फ 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मनौना गांव हज़ारों लाखों साल पहले ऋषि मुनियों की तपस्यास्थली एवं कर्मस्थली था, यहां ऋषियों के आश्रम स्थित थे और आश्रमों में बाल्यकाल से ही वेद , पुराणों , अस्त्रों , शास्त्रों आदि की शिक्षा प्रदान की जाती थी, पुरातन काल मे स्थित मढ़ियों के अवशेष आज भी गांव में हैं , मुनियों से अपभ्रंश होकर ही गांव का नाम मनौना पड़ा, इतिहास के बारे में एक बात सर्वविदित है, कि इतिहास एक समयांतराल पर खुद को दोहराता है, उसी का परिणाम आज का मनौना धाम है, बाबा श्याम की ये जन्मस्थली है , इस विषय मे साक्ष्य के तौर पर एक इतिहास है, बाबा श्याम का पूर्व नाम बर्बरीक है, इनके पिता का नाम घटोत्कच है, घटोत्कच पांडवो में द्वितीय महाबली भीम के पुत्र हैं, महाभारत के समय वन गमन के दौरान पांडव समस्त परिवार के साथ मनौना क्षेत्र से गुजरे थे, मनौना से 10 किलोमीटर की दूरी पर अहिच्छत्र(रामनगर) में एक विशाल टीले पर भीम का गदा आज भी मौजूद है, जहां पुराना किला भी स्थित है, महाभारत में एक घटना है जिसमे यक्ष द्वारा युधिष्ठिर से धर्मज्ञान से संबंधित प्रश्न पूंछे गए थे, वो प्रश्न जिस झील के किनारे पूंछे गए और जहां पांडव मूर्छित हो गए, वो जगह झील के रूप आज भी अहिच्छत्र से आगे 12 किलोमीटर दूर लिलौर नामक में गाँव मे स्थित है, पुरातन इतिहास से वर्तमान इतिहास में वापिस आते हैं और वर्तमान मनौना गांव के मनौना धाम बनने की रोचक यात्रा से परिचय करातें हैं , बात सन 2020 की है जब साल की शुरुआत से ही भारत के साथ सम्पूर्ण विश्व महाविनाशकारी कोरोना की चपेट में आ चुका था, और बंदिशों में यह बात प्रथम थी कि कोई घर से बाहर नही निकलेगा, इस बात का पूर्णतया पालन करते हुए पूज्य महन्त ओमेंद्र महाराज जी ने जंगल मे स्थित अपने खेतों को अपना घर बना लिया, चूंकि महन्त जी बचपन से एकांतवास पसंद करते थे इसलिए उन्हें जंगल मे रहना और भी आनंदायक लगने लगा, महन्त जी महाराज , बाबा श्याम के अनन्य भक्त तो थे ही सो उन्होंने एक खेत मे नीम के पेड़ के नीचे बाबा श्याम की पूजा साधना प्रारम्भ कर दी, पूज्य महन्त जी सरल पूजा पद्धति के समर्थक हैं, उसी प्रकार दिन रात एकांत में पूजा साधना करने लगे, और मन ही मन बार बार प्रार्थना करते रहते थे कि बाबा श्याम अब आप यहां आओ मैं आपका एक भव्य मंदिर बनाऊंगा और अब मैं कहीं नही जाऊंगा, जैसे बाबा श्याम तो प्रतीक्षा कर रहे थे कि उनका कोई सच्चा सरल भक्त उन्हें पुकारे, बाबा श्याम की प्रेरणा, आदेश, एवं ऋषि मुनियों के आशीर्वाद से पूज्य महन्त जी महाराज ने उस समय 4 बीघा भूमि मन्दिर निर्माण के लिये दान कर दी, और भूमि पूजन के लिये 7 अक्टूबर 2020 की दिनांक तय कर दी, निश्चित दिनांक को केवल 8 से 10 लोगों ने भूमिपूजन किया क्योंकि कोरोना की बजह से अधिक लोगों को आमंत्रित नही किया गया, चूंकि 2021 में कोरोना और भी ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ, 2021 के अंत मे मन्दिर निर्माण ने गति पकड़ी और बाबा श्याम की असीम कृपा और श्यामभक्तों के असीम सहयोग से श्री श्याम जी मन्दिर मनौना धाम में मन्दिर निर्माण एवं सभी आवश्यक जनसुविधाओं के निर्माण एवं स्थापना की अनवरत प्रक्रिया वर्तमान समय मे सफलता पूर्वक जारी है,मन्दिर निर्माण की सम्पूर्ण गतिविधियों को अक्टूबर 2023 तक पूर्ण कर लिया जाएगा, भक्तों की अधिक संख्या को देखते हुए प्रारम्भ में ही एक छोटे से कक्ष में बाबा श्याम की मूर्ति स्थापित कर दी गयी थी, जहां से बाबा श्याम की कृपा निरंतर भक्तों को लाभान्वित कर रही हैं, पूज्य महन्त जी महाराज आज भी 16 से 18 घंटे कार्यशील रहकर भक्तो की समस्याओं को सुनकर उनके लिये बाबा श्याम से प्रार्थना करते हैं, कलयुग में प्रमुख देव बाबा श्याम की कृपा और पूज्य महन्त जी महाराज के प्रयासों ने मनौना धाम के रूप में हिंदुत्व को मजबूती प्रदान की है, सनातन की जड़ों को पोषित करने का कार्य मनौना धाम का प्रमुख उद्देश्य है, वर्तमान सरकार का सहयोग समय समय पर मिलना कार्य करने के लिये उचित वातावरण निर्माण में बहुत सहायक है, मनौना धाम के कण कण और क्षण क्षण में बाबा का विद्दमान होना ही हम सब की असली पूंजी है, हिंदुत्व और सनातन की सरलता से परिचित होने के लिये आप भी मनौना धाम आइए और बाबा श्याम की कृपा और पूज्य महन्त श्री ओमेंद्र महाराज जी के आशीर्वाद से लाभान्वित होइए। जय श्री श्याम, जय मनौना धाम, जय हो महन्त जी महाराज।

PUJYA MAHANTJI'S TIMING :

गुरुवार से सोमवार तक (ग्रीष्मकालीन ऋतु) सुबह 8:00 AM TO 12:00 PM
शाम 7:30 PM TO 10:00 PM
गुरुवार से सोमवार तक (शीतकालीन ऋतु) सुबह 09:00 AM TO 01:00 PM
शाम 06:00 PM TO 9:00 PM

पूज्य महंत जी महाराज मंगलवार, बुधवार कों भक्तों से नहीं मिलते हैं।


Mandir Timing :

ग्रीष्मकालीन ऋतु सुबह 07:00 AM To 4:00 PM
शाम 06:30 PM To 10:00PM
शीतकालीन ऋतु सुबह 08:00 AM To 02:00 PM
शाम 05:00 PM To 09:00 PM

श्री श्याम जी मन्दिर मनौना धाम की प्रमुख विशेषताएं -

  1. जंगल मे स्थित होने के कारण से मन्दिर का भौगोलिक बातावरण बेहद साफ शुद्ध है, जिससे आध्यात्मिक शांति के साथ साथ, मानसिक और शारीरिक शांति भी प्राप्त होती है,
  2. मन्दिर पर संचालित सभी व्यवस्थाओं का पूज्य महन्त जी महाराज द्वारा दैनिक अवलोकन होने से भक्तों को कोई असुविधा नही होती है,
  3. कार्यशक्ति का केंद्रीकरण होने से निर्णय संबंधी समस्त शक्तियां पूज्य महन्त जी महाराज ने अपने हाथों में रखीं हैं जिससे समस्त कार्य सुचारू एवं तीव्रता से चलते रहते हैं।।
  4. इस समय मन्दिर की व्यवस्थाएं 70 बीघा क्षेत्र में संचालित हो रही हैं जिन्हें समयानुसार बढ़ाया जाता रहता है, भविष्य में इन्हें 200 बीघा क्षेत्र में संचालित किया जायेगा,
  5. बिभिन्न मन्दिरों पर पार्किंग संबंधी समस्याओं का अवलोकन करने के बाद मनौना धाम पर पार्किंग को पूर्णतया निःशुल्क रखा गया है, और जिसमे लाइट पंखा मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था भी निःशुल्क है,
  6. मन्दिर दर्शन एवं पूज्य महन्त जी मिलना पूर्णतया निःशुल्क है, VIP शैली को प्रतिवन्धित रखा गया है, केवल सरकार या प्रशासन की आवश्यक सेवाओं से जुड़े भक्तों को वरीयता प्रदान की गई है, जिनमे सेना, पुलिस, जज, स्वास्थ्य सेवाएं या डॉक्टर, एम्बुलेंस, और प्रशासनिक अधिकारियों को छूट प्रदान की गई है,
  7. मन्दिर से जुड़े या सेवाप्रदाता कोई भी सेवादार, पुजारी , व्यवस्थापक आपसे किसी भी सुविधा के लिये रुपये की मांग नही करते हैं , ऐसा होने पर निश्चित दंड का प्रावधान है जिसमे उनकी सेवा समाप्त होना भी शामिल है,
  8. मन्दिर निर्माण के लिये दान पूर्णतया स्वेच्छिक एवं आस्था अनुसार रखा गया, भार स्वरूप कोई भी सहयोग हम स्वीकार नही करते हैं न ही कोई रसीद या पर्ची काटते हैं, मनौना धाम पूजा पद्धति में सरलता एवं निःशुल्कता का समर्थक है,
  9. मनौना धाम पर चूंकि आसाध्य बीमारियों से ग्रसित भक्तगण डॉक्टरों द्वारा मना करने पर अंतिम उम्मीद के रूप में आते हैं, अधिकाँशता ठीक होकर ही घर जाते हैं लेकिन यदि धाम पर किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके परिवार के पास बाहन न होने की स्थिति में मनौना धाम द्वारा निःशुल्क बाहन व्यवस्था कराई जाती है
  10. विधुत व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिये सरकारी विधुत के अतिरिक्त 125 KVA के जेनरेटर की व्यवस्था की गई है, जिससे 24 घण्टे निर्बाध आपूर्ति प्राप्त होती रहती है,
  11. सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस सहयोग के अतिरिक्त निजी सुरक्षा व्यवस्था भी रहती है जिससे रातभर 1 किलोमीटर क्षेत्र में पेट्रोलिंग की जाती है,
  12. अधिकतर मन्दिरों पर व्याप्त जातिबाद पर सामाजिक कटाक्ष होता रहता है, पूज्य महन्त जी महाराज ने इस व्यवस्था में बहुत सुधार किया है, सभी जातियों के सेवादार मन्दिर व्यवस्था से जुड़े हुए हैं, जिससे हिंदुत्व को एक सूत्र में बांधा जा सके, सभी आपसी प्रेमभाव से साथ रहते हैं,
  13. मनौना धाम पर सभी सेवादार स्वयं के पास उपलब्ध समयानुसार सेवा करते हैं , उन्हें सेवा देने लिये बाध्य नही किया जाता है,
  14. मनौना धाम पर आवागमन की आसान सुविधा है, रेलवे स्टेशन से दूरी 5 किलोमीटर है, रोडवेज से दूरी सिर्फ 2 किलोमीटर है, मन्दिर तक खड़ंजे की व्यवस्था है जिसे शासनिक सहयोग से जल्द ही डामर रोड में परिवर्तित कर दिया जाएगा,

🚍 How to Reach – मनौना धाम कैसे पहुँचे

🚆 ट्रेन द्वारा निकटतम स्टेशन आंवला (Aonla) रेलवे स्टेशन – 7.4 KM
दूसरा स्टेशन बरेली जंक्शन (BAREILLY JN) – 44 KM
🚌 बस द्वारा निकटतम बस स्टैंड आंवला (AONLA)– 3.4 KM
दूसरा बस स्टैंड बरेली (BAREILLY) रोडवेज – 44 KM
तीसरा बस स्टैंड बरेली सैटेलाइट (BAREILLY Satellite) – 48 KM
✈️ विमान द्वारा निकटतम एयरपोर्ट बरेली, दिल्ली, लखनऊ (Bareilly, Delhi, Lucknow )